इस प्रस्तर स्तंभ का ऊपरी हिस्सा सदाशिव के रूप में बनाया गया है। इसमें चार दिशाओं की ओर से दिखाई देने वाले चार मुख हैं, जबकि पांचवां स्वरूप शीर्ष पर प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है। चार मुखों की पहचान क्रमश: पूर्व में तत्पुरुष, उत्तर में वामदेव, दक्षिण में अघोर और पश्चिम में सद्योजात के रूप में की गई है। शीर्ष पर पांचवां स्वरूप ईशान है।
पांचों स्वरूपों को अलग-अलग भाव-भंगिमा और पारंपरिक आभूषणों के साथ उकेरा गया है। जटामुकुट, कुंडल और अन्य अलंकरण इन मुखों की शिल्पगत विशेषता को और उभारते हैं। शिल्पशास्त्रीय परंपरा में सदाशिव के ये पांच स्वरूप भगवान शिव के व्यापक और सर्वव्यापी स्वरूप का प्रतीक माने जाते हैं।