Select Date:

अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर विदेशों से भी हो रहा शोध

Updated on 17-08-2026 03:12 PM

 रायपुर, 17 अगस्त 2026 / त्तीसगढ़ में पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। यह संस्था स्थानीय वैद्यों के प्रमाणीकरण, जड़ी-बूटियों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और सतत कटाई को बढ़ावा देती है।

वैद्य सम्मेलन में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और वनौषधियों के संवर्धन पर जोर

वैद्य सम्मेलन में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और वनौषधियों के संवर्धन पर जोर

औषधि पादप बोर्ड द्वारा स्वास्थ्य परंपरा वैद्यों को प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा वैद्यों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित और आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में विगत 14 अगस्त को नारायणपुर वनमंडल कार्यालय सभागार में जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन आयोजित किया गया। 

वैद्यों ने साझा किया पारंपरिक उपचार का ज्ञान

बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। वनमंडल अधिकारी श्री वेंकटेश एम. जी. ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। सम्मेलन में वैद्य रतन रंजन धर, कज्जाराम गोटा, रूपसिंह, सुखदेव, सोमनाथ, फूलसिंह, अमृतलाल और हरिचंद सहित अन्य वैद्यों ने पारंपरिक जड़ी-बूटियों और उपचार पद्धतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वैद्यों ने नारायणपुर में वनौषधियों के संरक्षण और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर्बल गार्डन विकसित करने की मांग रखी।

वैद्यों के लिए कई योजनाएं संचालित

बोर्ड के कंसल्टेंट श्री अमित गुप्ता ने वैद्यों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वैद्य समूहों को जड़ी-बूटियों को उच्च गुणवत्ता के साथ पीसने के लिए निःशुल्क पल्वराइजर मशीन उपलब्ध कराई जा रही है। हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्य अपनी बाड़ी में सामान्य रूप से उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा उद्यान विकसित कर सकते हैं। इसके लिए बोर्ड आर्थिक और तकनीकी सहयोग प्रदान करता है। 

 वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों के प्रमाणीकरण

वैद्यों के गांव में संचालित स्कूलों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने और उसके रखरखाव के लिए भी तकनीकी एवं आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया फब्प् के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संरक्षित और प्रमाणित करने में मदद मिलेगी।

3 हजार हेक्टेयर में वनौषधियों का रोपण

वनमंडल अधिकारी श्री वेंकटेश एम. जी. ने सम्मेलन के आयोजन के लिए बोर्ड का आभार व्यक्त किया। उन्होंने वैद्यों की मांग पर नारायणपुर में हर्बल गार्डन विकसित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि नारायणपुर वनमंडल में वनौषधियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया जा रहा है। वनौषधियों की रिपॉजिटरी तैयार करने के साथ वैद्यों के पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।

दुर्लभ वनौषधियों के संरक्षण में वैद्यों की महत्वपूर्ण भूमिका

बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वैद्यों के उत्थान और पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने वैद्यों से वनौषधियों के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि रसना जड़ी, जो विलुप्ति की कगार पर है, नारायणपुर के छोटे डोंगर और बेनूर क्षेत्र के जंगलों में पाई जाती है। इसी तरह लगभग विलुप्तप्राय दहीमन भी नारायणपुर के जंगलों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुर्लभ वनौषधियों का संरक्षण सरकार और वैद्यों की साझा जिम्मेदारी है। बोर्ड द्वारा विलुप्तप्राय 50 दुर्लभ वनौषधियों की पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।

अबूझमाड़ की परंपरा पर विदेशों से भी हो रहा शोध

श्री मरकाम ने कहा कि आज अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर शोध करने के लिए विदेशों से भी अनुसंधानकर्ता आ रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान परंपरा की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पारंपरिक ज्ञान और वनौषधीय विरासत को सहेजने की बड़ी जिम्मेदारी स्थानीय वैद्यों की भी है।


वैद्यों की समस्याओं के समाधान के निर्देश

सम्मेलन में श्री विकास मरकाम ने वैद्यों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने छोटी-छोटी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए वनमंडल अधिकारी श्री वेंकटेश एम. जी. को आवश्यक निर्देश दिए। कार्यक्रम के अंत में बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने सम्मेलन में शामिल सभी वैद्यों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

नारायणपुर जिले के 25 वैद्यों सहित लगभग 60 से 70 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन में नारायणपुर जिले के 25 वैद्यों सहित लगभग 60 से 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा । इस अवसर पर उपवनमंडल अधिकारी श्री हीरे सिंह उइके, श्रीमती प्रीति यादव, श्री राजेश कश्यप, परिक्षेत्र अधिकारी श्री इंद्र कुमार यादव, श्री भोगनाथ नायक, श्रीमती वर्षा कश्यप, श्री भूषण सिंह ठाकुर सहित नारायणपुर वनमंडल एवं बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 17 August 2026
रायपुर, 17 अगस्त 2026 / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव आज एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज सुबह…
 17 August 2026
रायपुर, 17 अगस्त 2026 / प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं कोरबा विधायक श्री लखन लाल देवांगन के सशक्त नेतृत्व में कोरबा नगर में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के संकल्प के…
 17 August 2026
रायपुर, ​17 अगस्त 2026 / सुशासन की दिशा में अग्रसर राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन को डिजिटल बनाकर आम जनता के जीवन को सरल और चिंतामुक्त करने का एक ऐतिहासिक अध्याय…
 17 August 2026
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में स्वतंत्रता दिवस हर्षाेल्लास से मनाया गया। राज्य सूचना आयोग  के मुख्य सूचना आयुक्त श्री अमिताभ जैन ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी…
 17 August 2026
 रायपुर, 17 अगस्त 2026 / त्तीसगढ़ में पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड सक्रिय रूप से कार्य…
 17 August 2026
कोण्डागांव, 17 अगस्त 2026 / जिले के शिक्षित युवक-युवतियों को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, कोण्डागांव द्वारा 20 अगस्त…
 17 August 2026
 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 17 अगस्त 2026 / आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं मानक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने तथा रक्षाबंधन पर्व के दौरान मिलावटी, अमानक एवं असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी…
 17 August 2026
महासमुंद, 17 अगस्त 2026 / कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देशानुसार एनालॉग पनीर के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध के उल्लंघन की आशंका को देखते हुए राजस्व,खाद्य एवं औषधि प्रशासन, पुलिस…
 17 August 2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 17 अगस्त 2026 / जिले में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2026-27 का आयोजन 18 से 21 अगस्त तक किया जा रहा है। प्रतियोगिता के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन…
Advt.