Select Date:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-विदेश में बच्चों की कस्टडी के आदेश का आंख मूंदकर पालन न करें, इन मामलों का निपटारा आसान नहीं होता

Updated on 23-10-2026 11:32 AM
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: एनआरआई जोड़ों के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर होने वाले विवाद अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई का रूप ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में, जब एक पक्ष को विदेशी अदालत से अपने पक्ष में आदेश मिल जाता है, जबकि दूसरा पक्ष भारतीय अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारतीय अदालतों को स्वतंत्र रूप से यह तय करना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या बेहतर है। विदेशी अदालत के फैसले को अपने आप नहीं मान लेना चाहिए, हालांकि, उस पर उचित विचार जरूर किया जाना चाहिए।

इन मामलों का निपटारा करना आसान नहीं होता

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि ऐसे मामले बार-बार उनके सामने आ रहे हैं जिन पर विदेशी अदालतें पहले ही फैसला सुना चुकी हैं। इन मामलों का निपटारा करना आसान नहीं होता, क्योंकि इनमें बेहद भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दे शामिल होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चे के कल्याण को “सबसे व्यापक अर्थ में समझा जाना चाहिए, न कि केवल पैसे या भौतिक सुख-सुविधाओं के नजरिए से”।
यह स्थिति दो आधारों पर टिकी है। पहला यह कि एक बार जब कोई मामला अदालत के सामने आता है, तो वह अपने 'पेरेन्स पैट्रिया' अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करती है। इस अधिकार क्षेत्र के तहत अदालत का यह कर्तव्य है कि वह बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखते हुए खुद मामले पर विचार करे और उसका आकलन करे। दूसरा यह कि ऐसे मामलों में फैसला पक्षों के कानूनी अधिकारों के आधार पर नहीं, बल्कि बच्चे के कल्याण के आधार पर लिया जाता है।

कस्टडी और संरक्षकता से जुड़े भारतीय कानून बच्चे के कल्याण पर ही आधारित

कस्टडी और संरक्षकता से जुड़े हमारे कानूनों में भी कानूनी अधिकारों के बजाय बच्चे के कल्याण पर ही सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। ये कानून स्पष्ट करते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति कस्टडी या संरक्षकता पाने का कानूनी हकदार हो, फिर भी उसे यह अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए, अगर इससे बच्चे का कल्याण न होता हो। इसलिए, इसमें कोई संदेह नहीं है कि किसी विदेशी अदालत के आदेश के मुकाबले बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है।
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि दूसरे शब्दों में कहें तो, इस देश की कोई अदालत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते समय, किसी विदेशी अदालत के आदेश का आंख मूंदकर पालन नहीं कर सकती और न ही वह केवल उस आदेश को लागू करने वाली अदालत (एक्जीक्यूटिंग कोर्ट) बनकर रह सकती है।

विदेशी अदालत के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई माता-पिता विदेशी अदालत के आदेश को नहीं मानते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय अदालत को उस आदेश को अपने आप लागू कर देना चाहिए। साथ ही, बच्चे के कल्याण को सबसे ऊपर रखने का यह मतलब भी नहीं है कि विदेशी अदालत के आदेश को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया जाए।
पीठ ने कहा कि बच्चे के कल्याण के लिए क्या जरूरी है, यह तय करते समय अदालत को अपना स्वतंत्र फैसला लेना चाहिए। हालांकि, ऐसा करते समय उसे विदेशी अदालत के आदेश को भी उचित महत्व देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश देते हुए निर्देश दिया कि सात साल की एक बच्ची, जो अमेरिकी नागरिक है और जिसे उसकी मां कैलिफोर्निया की कस्टडी (संरक्षण) संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन करके भारत ले आई थी, उसे वापस अमेरिका भेज दिया जाए।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 23 October 2026
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह स्वीकार किया है कि अस्पताल मरीजों से दवाओं और अन्य जरूरी सामानों के लिए बहुत अधिक MRP वसूलते…
 23 October 2026
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: एनआरआई जोड़ों के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर होने वाले विवाद अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई का रूप ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में, जब…
 23 October 2026
नई दिल्ली: सूचना का अधिकार के तहत हुए हालिया खुलासे के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर निर्वाचन आयो के आंतरिक कामकाज में दखल देने से इनकार…
 23 October 2026
नई दिल्ली: भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और अहम कदम उठाया गया है। नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने…
 23 October 2026
नई दिल्ली: पिछले महीने केंद्र सरकार ने राज्यों को आगाह किया था कि जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरी, राज्य की अनुमतियों और यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण राष्ट्रीय लीनियर…
 23 October 2026
नई दिल्ली: एक मां, एक बच्चा और कस्टडी की लंबी कानूनी लड़ाई। अब इस मामले में इंटरपोल भी शामिल हो गया है। रूसी नागरिक विक्टोरिया बसु पर आरोप है कि…
 22 October 2026
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी के साथ-साथ राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान समेत केंद्रीय…
 22 October 2026
जंतर मंतर पर हुए दो बड़े आंदोलनों ने छात्र राजनीति, लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध की ताकत पर नई बहस छेड़ी है। आंदोलन की सफलता और विरोध की नई परिभाषा पर…
 22 October 2026
नई दिल्ली: वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेता वोट चोरी के मुद्दे पर अपने अभियान को आगे बढ़ाने की…
Advt.