हिंद महासागर में चीन को घेरेंगे भारत-अमेरिका, श्रीलंका, मालदीव और मॉरिशस में क्या है IOSV प्लान?
Updated on
08-10-2026 11:50 AM
वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका मिलकर हिंद महासागर में अपनी स्थति मजबूत करने के प्लान पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों की श्रीलंका , मालदीव और मॉरीशस जैसे क्षेत्रीय देशों में बंदरगाहों और टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर रणनीतिक सहयोग की योजना है। हिंद महासागर में यह पार्टनरशिप इंडियन ओशन स्ट्रैटेजिक वेंचर (IOSV) के तहत होने की उम्मीद है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी 2025 में अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान शुरू किया था। इसे खासतौर से चीन की हिंद महासागर में आक्रामकता रोकने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है। चीन की इस क्षेत्र में गतिविधियां भारत और अमेरिका के लिए चिंता का सबब बनता रहा है।
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि भारत बंदरगाह बनाने में बहुत अच्छा है। हमारे पास उन बंदरगाहों को बनाने में मदद करने के लिए पैसा है। हम देख रहे हैं कि कैसे वहां जाकर इन अहम देशों में अपने संसाधनों को मिलाकर आगे बढ़ा सकते हैं। इसलिए हम बंदरगाहों पर ध्यान दे रहे हैं। हम समुद्री सुरक्षा और फिर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दे रहे हैं। हम 6G पर भी गौर कर रहे हैं। स्टैंडर्ड्स की अगली पीढ़ी कैसी होगी और अमेरिका और भारत इसमें कैसे लीडर और पार्टनर बन सकते हैं। असल में यही मुख्य विषय हैं।
समुद्री सुरक्षा पर फोकस
समुद्री सुरक्षा और गवर्नेंस को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करना भी दोनों देशों के लिए एक मुख्य फोकस होगा। इसमें इस क्षेत्र में गैर-कानूनी मछली पकड़ने, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार का मुकाबला करना शामिल हो सकता है। स्टेट डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारी ने संकेत दिया कि रिसर्च वेसल (शोध पोत) होने का दावा करने वाले विदेशी जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखना भी फोकस हो सकता है। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि हिंद महासागर में चीनी हाइड्रोग्राफिक रिसर्च वेसल्स की गतिविधियों को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताएं लंबे समय से रही हैं।
IOSV का एक मुख्य मकसद रणनीतिक प्रोजेक्ट्स के मामले में क्षेत्रीय देशों को चीन की सरकारी कंपनियों के मुकाबले आर्थिक विकल्प देना भी होगा। अधिकारी ने इस पर कहा, 'हम विकल्प देना चाहते हैं और हम हमेशा मुकाबला नहीं कर सकते क्योंकि कभी-कभी लागत का हिसाब सही नहीं बैठता। हमारा प्राइवेट सेक्टर वैसी कीमतें नहीं दे सकता जैसी सरकारी कंपनी दे सकती है और इसलिए हम कहते हैं कि अमेरिका और भारत इस पर मिलकर कैसे काम कर सकते हैं।' IOSV के तहत दोनों देशों की ओर से किए जाने वाले काम में क्षेत्रीय सरकारों की क्षमताओं को बेहतर बनाना भी शामिल होगा।
दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा
अधिकारी ने आगे कहा, 'ये ऐसी चीजें हैं जो हम दोनों के लिए स्वाभाविक रूप से सही हैं। इनसे हमारा देश और भारत ज्यादा सुरक्षित बनते हैं। इसलिए हम मिलकर काम कर रहे हैं ताकि उनके समुद्री इलाकों और वहां हो रही गतिविधियों को समझा जा सके और उन्हें ऐसा करने के लिए जरूरी टूल्स और संसाधन दिए जा सकें, खासकर श्रीलंका जैसे देशों को। हमने हाल ही में श्रीलंका को चौथा US कोस्ट गार्ड कटर दिया है और वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।'
विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एलिसन हुकर ने पिछले महीने एक फोन कॉल के दौरान IOSV की संभावनाओं पर चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने पिछले महीने UN जनरल असेंबली (UNGA) के हाई-लेवल वीक के दौरान न्यूयॉर्क में हुई बैठकों में भी IOSV पर बातचीत की थी। अक्टूबर के आखिर में US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के भारत दौरे की उम्मीद के बीच भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में तेजी आई है।
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