अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा ने भाजपा संगठन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि 2003 में अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन 23 साल बाद भी यह पूरा नहीं हुआ।
उमा भारती ने 2003 में किया था आंदोलन
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा, कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह, अंशकालीन कर्मचारी अध्यक्ष उमाशंकर पाठक सहित अन्य पदाधिकारियों ने पत्र में कहा कि 2003 का विधानसभा चुनाव भाजपा ने अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर लड़ा था। तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। उन्होंने प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा किया था।
संगठन के मुताबिक उस समय अंशकालीन कर्मचारी, मस्टर श्रमिक और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी बड़ी संख्या में सरकारी काम संभालते थे। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई, खाना बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी, नल-जल व्यवस्था, अस्पतालों में विभिन्न सेवाएं, नगरीय निकायों में सफाई और टैक्स वसूली जैसे काम भी इन्हीं कर्मचारियों से कराए जाते हैं।
23 साल में वेतन में मामूली बढ़ोतरी
कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा ने कहा कि 2003 में जिन अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपए मिलते थे, उन्हें अब 4-5 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। पंचायतों के चौकीदार और नल-जल कर्मचारी तब करीब 2 हजार रुपए पाते थे, जबकि वर्तमान में भी कई कर्मचारियों को 2-3 हजार रुपए ही मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाल परेड ग्राउंड में अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा की थी, लेकिन इसे भी पूरा नहीं किया गया। संगठन अब सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपए न्यूनतम वेतन की मांग कर रहा है।
7 और 8 सितंबर को अलग-अलग प्रदर्शन
संगठन के अनुसार स्कूलों, छात्रावासों और विभिन्न विभागों के अंशकालीन कर्मचारी 7 सितंबर को भाजपा कार्यालय पहुंचेंगे। ग्राम पंचायतों के चौकीदार, नल-जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को संगठन के समक्ष अपनी मांग रखेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने सरकार के 1.62 लाख रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी 2 से 5 हजार रुपए महीने में काम कर रहे हैं, तो महंगाई के दौर में उनके जीवन-यापन की स्थिति पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
मोर्चा ने चेतावनी दी है कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण की मांग पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना-अनशन शुरू किया जा सकता है।