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नैनीताल में बसा है माता रानी का चमत्कारी पाषाण मंदिर

Updated on 24-06-2026 05:00 PM
नैनीताल में पाषाण मंदिर स्थित है, जिसके बारे में माना जाता है कि यहां जाने मात्र से ही स्किन से जुड़ी और हकलेपन की हर समस्या दूर हो जाती है। 
जानिए इस मंदिर की दिलचस्प बातें :
देश में शायद ही ऐसी कोई जगह होगी, जहां आपको दिव्य मंदिरों का उल्लेख न मिले। ये मंदिर न केवल रहस्यमयी होते हैं बल्कि उनसे जुड़ी मान्यताएं और कथाएं भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेती हैं। ऐसा ही एक मंदिर नैनीताल की पहाड़ियों पर स्थित है, जो अपने अद्भुत चमत्कार के लिए इस जगह को और भी ज्यादा लोकप्रिय बना देता है।
हम बात कर रहे हैं यहां के देवी मंदिर की, जिसके बारे में माना जाता है कि यहां आने वाले हर चर्म रोगी को अपनी बिमारी से छुटकारा मिलता है। यही नहीं, अगर किसी को भी हकलेपन की समस्या है, वो भी माता रानी दूर कर देती है। अगर आप भी मंदिर जाने के लिए बेहद उत्सुक हैं, तो चलिए हम आपको इस मंदिर के बारे में थोड़ी और जानकारी देते हैं।

​इस नाम से जाना जाता है मंदिर ​:
जैसा कि आप जानते हैं उत्तराखंड को देव भूमि कहते हैं और यहां स्थित नैनीताल हिल स्टेशन इस जगह की शोभा को और बढ़ा देता है। पहाड़ों पर मौजूद देवी मां का चमत्कारी मंदिर पाषाण देवी के नाम से फेमस है। माना जाता है कि इस मंदिर का जल बेहद पवित्र है, इस जल के शरीर पर पड़ते ही किसी भी तरह का चर्म रोग दूर हो जाता है।

​वाणी से जुड़ी हर समस्या होती है दूर ​:
न केवल छींटे मात्र से, अगर कोई भी व्यक्ति इस पवित्र जल का सेवन करता है, उसकी वाणी से जुड़ी हर तरह की समस्या दूर हो जाती है, खास तौर पर हकलेपन की बीमारी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। मंदिर में रखे इस जल की वजह से ही मंदिर का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। 

​यहां कौनसी माता स्थापित हैं ​: 
नैनी झील के किनारे पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में मां भगवती विराजमान हैं। मंदिर में माता की प्राकृतिक रूप से मूर्ती स्थापित है और माना जाता है कि यहां देवी मां साक्षात रूप से वास करती हैं। मंदिर की एक विशेषता ये भी है यहां आप मां भगवती के पूरे नौ रूपों के दर्शन कर सकते हैं।

​इन बीमारियों से मिलता है निजात ​: 
प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई नौ पिंडियों पर पहले जल्द छिड़का जाता है और फिर उस जल को लोगों को दिया जाता है। इस जल का महत्त्व इतना है कि श्रद्धालू दूर-दूर से इस जल को लेने के लिए यहां आते हैं। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि यहां मिलने वाला जल त्वचा का हर रोग दूर कर देता है, वाणी की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है, यही नहीं हाथ-पैरों में सूजन से भी निजात मिलता है। दिलचस्प बात तो ये है मां के जल को हर दस दिन में एक बार निकाला जाता है। इस जल को निकालने को निकालने से पहले दिन, समय और तिथि देखी जाती है, इसके बाद से भक्तों की भीड़ लगना शुरू हो जाती है।

​कैसे पहुंचे पाषाण देवी मंदिर, नैनीताल ​:
सड़क द्वारा: नैनीताल उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों से अच्छे से जुड़ा हुआ है, आप आसानी से नैनीताल के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं, मंदिर नैनीताल बस स्टैंड (तल्लीताल) से करीबन 1 किमी दूर है, यहां से पैदल भी जा सकते हैं या रिक्शा भी ले सकते हैं।
ट्रेन से: पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है जो नैनीताल से लगभग 32 किमी दूर है, आप नैनीताल के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं जो आसानी से उपलब्ध है।
हवाईजहाज से: पास का हवाई अड्डा पंतनगर हवाई अड्डा है जो लगभग 69 किमी दूर है, वहां से आप आसानी से नैनीताल के लिए टैक्सी बुक कर सकते हैं।

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