हम भारतीय सेना और प्रशासन के हमेशा आभारी रहेंगे कि उन्होंने पापा का नाम उस जगह अमर कर दिया जहां उनका जन्म हुआ था- गंगानगर और जहां उन्होंने आखिरी सांस ली- कश्मीर घाटी। उनकी कुर्बानी, हिम्मत, संस्कार और जज़्बा उनके साथी सैनिकों और हम सभी की यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे।

