एस-400 की मिसाइल कैसे शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल बनी?
मूल रूप से एस-400 एक एयर डिफेंस सिस्टम है लेकिन इसके कमांड सॉफ्टवेयर में बदलाव कर इसे बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर जमीन के लक्ष्यों की ओर दागने के योग्य बनाया गया है। रूस सोवियत काल के बचे हुए और सेवा अवधि पूरी कर चुके एस-300 और एस-400 इंटरसेप्टर मिसाइल स्टॉक का उपयोग जमीनी हमलों के लिए कर रहा है। यह सिस्टम वर्टिकल कोल्ड लॉन्च तकनीक का उपयोग करता है जिससे मिसाइल बिना लॉन्चर घुमाए सीधे ऊपर उठकर तय किए गए जमीनी कोऑर्डिनेट्स की तरफ मुड़ जाती है।इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि ये दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रम में डाल देते हैं लेकिन नुकसान ये है कि इन मिसाइलों में जमीनी हमलों के लिए सटीक गाइडेंस और भारी वॉरहेड की कमी होती है जिससे यह पारंपरिक सामरिक मिसाइलों की तुलना में कम सटीक और नागरिकों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित होती हैं।









