NGO ने दिए अपने तर्क
एक भारतीय NGO ने बीते हफ्ते IWT (सिंधु जल संधि) की समीक्षा की मांग की है। इसका तर्क है कि इस क्षेत्र में पानी की सुरक्षा से जुड़ी बदलती स्थितियों को देखते हुए 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते का आज के मानवाधिकारों के नजरिए से फिर से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।सुरक्षित पेयजल और साफ-सफाई के मानवाधिकारों पर विशेष रिपोर्टर के साथ इंटरैक्टिव डायलॉग के तहत UNHRC के 63वें सत्र में आइटम 3 पर अपना बयान देते हुए, दिल्ली स्थित NGO ने कहा कि पानी तक पहुंच का सीधा संबंध जीवन, स्वास्थ्य, भोजन, आवास, सम्मान और विकास के अधिकारों से है।
NGO ने कहा कि सिंधु संधि लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अहम उदाहरण होने के बावजूद छह दशक में पानी की सुरक्षा से जुड़े हालात बदल गए हैं। इसमें आबादी में बढ़ोतरी, जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पीछे हटने, भूजल के कम होने और नदियों के बहाव में लगातार अनिश्चितता जैसे कारण हैं।

