मुजफ्फरपुर से मुंबई तक: 'स्वदेश' का मोहन भार्गव बनने का सपना, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ निलय मिताश ने एक्टिंग को चुना
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05-08-2026 12:16 PM
बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले निलय मिताश पेशे से अभिनेता हैं, कहानियां भी लिखते हैं... और डिग्री के हिसाब से इंजीनियर भी हैं। साल 2010 में उन्होंने मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। और आज भी अगर उनसे पूछा जाए, तो पूरे यकीन के साथ कहेंगे कि वही दुनिया का सबसे 'कूल' इंजीनियरिंग कॉलेज है। पढ़ाई पूरी होने के बाद बेंगलुरु स्थित इन्फोसिस में उनकी नौकरी लग गई। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन उन्होंने एक सुरक्षित करियर छोड़कर सिर्फ एक सपना लेकर मुंबई आने का फैसला किया अभिनेता बनने का सपना।
पिछले चौदह वर्षों में उन्होंने उस सपने के साथ आने वाली लगभग हर चुनौती का सामना किया है। अनगिनत ऑडिशन, रिजेक्शन, लंबा इंतज़ार, खुद पर संदेह... और हर बार फिर से उठ खड़े होने का हौसला। आज वही सफर एक अहम मुकाम पर पहुंचा है। उनकी पहली वेब सीरीज, जिसमें वह मुख्य भूमिका निभा रहे हैं- 'हेलो... हम बोल रहे हैं'अब Waves OTT पर स्ट्रीम हो रही है।
निलय कहानियों को कैसे देखते हैं?
अभिनय के साथ-साथ निलय लेखन भी करते हैं। उनका मानना है कि अच्छी कहानियों में भाषा, जगह और लोगों के बीच की दूरियां मिटाने की ताकत होती है। शायद यही वजह है कि वह वही कहानियां लिखते हैं, जिन्हें एक दिन खुद अभिनेता के रूप में पर्दे पर जीना चाहते हैं।
इंजीनियरिंग चुना और एक्टिंग का सपना रह गया
ज़्यादातर बच्चों की तरह मैंने भी वही रास्ता चुना, जो सुरक्षित माना जाता है- इंजीनियरिंग। उस समय दूर-दूर तक मेरा अभिनय की दुनिया में आने का कोई इरादा नहीं था। आखिर मुजफ्फरपुर जैसे छोटे शहर के किसी लड़के के लिए 'हीरो' बनना हकीकत से ज़्यादा एक ख़्वाब ही तो लगता है। हां, बचपन में क्रिकेटर बनने का सपना ज़रूर था। लेकिन धीरे-धीरे समझ आ गया कि मेरी क्रिकेट खेलने की काबिलियत मुझे ज़्यादा से ज़्यादा कोच बना सकती है... या फिर बैठे-बैठे कप्तानी करने वाला कप्तान- अगर क्रिकेट में ऐसी कोई पोस्ट होती तो।
इन्फोसिस की नौकरी छोड़ एक्टिंग चुना
अलग-अलग किरदारों को समझना, उनके बारे में जानना और कुछ समय के लिए उनकी जिंदगी जीना... मुझे जीने का एक नया मकसद दे रहा था। हर सुबह अब उठने की एक नई वजह थी। लेकिन फिर भी... इन्फोसिस की सुरक्षित नौकरी छोड़ने और आगे MBA करने का सपना छोड़ने की हिम्मत मैं नहीं जुटा पा रहा था। फिर शायद किस्मत ने फैसला कर लिया कि अब जवाब देने की बारी उसकी है।
ऑफिस जाते वक्त हुआ हादसा
एक दिन मैं ऑटो से ऑफिस जा रहा था। रास्ते भर यही सोच रहा था कि क्या अभिनय को करियर बनाना बहुत बड़ा रिस्क होगा? मुझे क्या पता था कि कुछ ही मिनटों में ज़िंदगी इस सवाल का जवाब इतने बेरहम अंदाज़ में देने वाली है।मबारिश हो रही थी। सड़कें फिसलन भरी थीं।मअचानक ऑटो जोर से फिसला... सड़क के डिवाइडर पर चढ़ा... और पलट गया।मकुछ देर के लिए मैं बेहोश हो गया, लेकिन जान बच गई और दूसरा जीवन आज सामने है।
निलय के साथ हुए हादसे ने बदली जिंदगी
आज पीछे मुड़कर देखता हूं, तो समझ आता है कि उस हादसे ने सिर्फ मेरा करियर नहीं बदला था। उसने जिंदगी को देखने का मेरा नजरिया ही बदल दिया था। क्योंकि कहीं न कहीं, मैं हमेशा से जानता था कि अभिनय मेरे लिए सिर्फ एक शौक नहीं था। यही वह काम था, जो मैं सचमुच अपनी पूरी जिंदगी करना चाहता था। एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर मुंबई आना आसान नहीं था। मुंबई आने के बाद मैंने बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो जॉइन किया, जहां मैंने अपने बैच के टॉपर्स में जगह बनाई। वहां लगभग हर कोई कहता था कि मैं एक अच्छा अभिनेता हूं। सच कहूं तो उस वक़्त मुझे पूरा यकीन था कि कोर्स खत्म होते ही प्रोड्यूसर स्टूडियो के बाहर कॉन्ट्रैक्ट लेकर मेरा इंतजार कर रहे होंगे। और वो सपना पूरा हुआ।
निलय के साथ हुए हादसे ने बदली जिंदगी
आज पीछे मुड़कर देखता हूं, तो समझ आता है कि उस हादसे ने सिर्फ मेरा करियर नहीं बदला था। उसने जिंदगी को देखने का मेरा नजरिया ही बदल दिया था। क्योंकि कहीं न कहीं, मैं हमेशा से जानता था कि अभिनय मेरे लिए सिर्फ एक शौक नहीं था। यही वह काम था, जो मैं सचमुच अपनी पूरी जिंदगी करना चाहता था। एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर मुंबई आना आसान नहीं था। मुंबई आने के बाद मैंने बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो जॉइन किया, जहां मैंने अपने बैच के टॉपर्स में जगह बनाई। वहां लगभग हर कोई कहता था कि मैं एक अच्छा अभिनेता हूं। सच कहूं तो उस वक़्त मुझे पूरा यकीन था कि कोर्स खत्म होते ही प्रोड्यूसर स्टूडियो के बाहर कॉन्ट्रैक्ट लेकर मेरा इंतजार कर रहे होंगे। और वो सपना पूरा हुआ।
'हेलो... हम बोल रहे हैं' सीरीज के बारे में
'हेलो... हम बोल रहे हैं' की बात करें, तो इसके प्रोड्यूसर मनीत सिह ओबेरॉय, SJ और सुजीत हैं। डायरेक्टर अभ्यांक-आनंद हैं। बिहार की मिट्टी से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जिसमें हास्य, भावनाएं और ड्रामा बहुत सहज तरीके से एक साथ चलते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह छोटे शहरों की ज़िंदगी को बिना बनावटीपन के बेहद ईमानदारी से दिखाती है। इस वेब सीरीज़ की शूटिंग बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली और संधा गांव में हुई है।
निलय का सपना कैसे रोल्स करने का?
निलय के ड्रीम रोल्स के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 'तमाशा' का वेद, 'स्वदेश' का मोहन भार्गव और शौर्य फिल्म से के के मेनन का रोल निभाने का सपना है। वो इसी तरह के सिनेमा को एक्सप्लोर करना चाहते हैं।
आने वाले प्रोजेक्ट्स क्या हैं, इस पर क्या बोले निलय?
इस समय मैं एक फीचर फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं, जिसमें मैं लीड रोल कर रहा हूं। इस मल्टी-स्टारर फिल्म में चंकी पांडे, व्रजेश हीरजी, न्यारा बनर्जी, दिव्या अग्रवाल सहित कई बेहतरीन कलाकार हैं। फिल्म के निर्माता ईश्वर कुमार हैं और इसके अंतिम शेड्यूल की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है। मेरी लिखी हुई दो स्क्रीनप्ले को पर्दे तक पहुंचाने के लिए कुछ लोगों के साथ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।
बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले निलय मिताश पेशे से अभिनेता हैं, कहानियां भी लिखते हैं... और डिग्री के हिसाब से इंजीनियर भी हैं। साल 2010 में उन्होंने मणिपाल इंस्टीट्यूट…
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