महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक परिवार की बेटी स्वीडन में बनी सांसद, 15 साल की उम्र में दादाजी पढ़वाते थे बजट!
Updated on
20-09-2026 01:26 PM
स्टॉकहोम: महाराष्ट्र के शिक्षाविद अशोक विखे पाटिल की बेटी नीला विखे पाटिल 13 सितंबर को हुए स्वीडन के राष्ट्रीय चुनाव में स्टॉकहोम शहर निर्वाचन क्षेत्र से स्वीडिश संसद के लिए चुनी गई हैं। वह 'रिक्सडैग' यानि स्वीडिश संसद के 349 सदस्यों में से एक बनने जा रही हैं। चुनाव के बाद नीला ने PTI से कहा '349 सदस्यों वाली संसद का हिस्सा बनकर अच्छा लग रहा है। मैं शहर और देश के लिए योगदान देने को लेकर उत्साहित हूं।'
नीला विखे पाटिल कौन हैं?
नीला, महाराष्ट्र के शिक्षाविद और विखे पाटिल फाउंडेशन के चेयरमैन अशोक विखे पाटिल की बेटी हैं और महाराष्ट्र के जाने-माने विखे पाटिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह दिवंगत केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल की पोती और विट्ठलराव विखे पाटिल की पड़पोती हैं जिन्होंने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी। महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल उनके चाचा हैं। नीला को बहुत छोटी उम्र से ही राजनीति की शिक्षा दी गई और उनके दादाजी ने 15 साल की उम्र में ही बजट को समझाना शुरू कर दिया था।
अहमदनगर से स्वीडिश संसद तक का राजनीतिक सफर
हालांकि नीला का जन्म स्वीडन में हुआ था लेकिन उनका बचपन भारत में बीता। नीला का शुरूआती जीवन अहमदनगर में बीता और भारत के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं। वह लगभग 25 वर्षों से स्वीडन की ग्रीन पार्टी से जुड़ी हुई हैं और स्टॉकहोम ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति की सदस्य भी हैं। स्वीडिश संसद में आने से पहले नीला ने स्टीफन लोफवेन प्रशासन के दौरान स्वीडन के प्रधानमंत्री कार्यालय में राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम किया, जहां उन्होंने वित्त, टैक्स और आवास जैसे मुद्दों पर काम किया। वह स्टॉकहोम नगर परिषद की सदस्य भी थीं।
महाराष्ट्र के मशहूर शिक्षाविद की बेटी कैसे बनी स्वीडन की सांसद?
नीला 2020 से PwC के साथ काम कर रही हैं और अप्रैल 2025 में एक आधिकारिक पब्लिक अकाउंटेंट बनीं। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से बैचलर डिग्री और MBA किया है और मैड्रिड की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई की है। नीला ने कहा 'मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं जो वोट नहीं दे सकते।' उन्होंने आगे कहा 'मैं ऐसे समाज में योगदान देना चाहती हूं जहां हर बच्चे को अच्छे भविष्य का मौका मिले। हमें एक ऐसा रहने लायक ग्रह चाहिए जहां साफ पानी हो, जीवंत प्रकृति हो और इंसानों की वजह से होने वाली प्राकृतिक आपदाएं कम से कम हों।'
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