भारतीयों पर असर
H-1B प्रोग्राम के तहत अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, शिक्षा और रिसर्च जैसे खास क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को काम पर रख सकती हैं। अमेरिका हर साल 65,000 रेगुलर H-1B वीजा और एडवांस्ड डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 वीजा जारी करता है। फीस में बढ़ोतरी और कथित सख्त निगरानी का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर ही पड़ेगा।वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका का H-1B वीजा पाने वाले 70 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी भारत से थे। इसके बाद चीन (12 फीसदी) और फिर बाकी देशों के लोग थे। जाहिर है कि अगर ये वीजा सबसे ज्यादा भारतीय पा रहे हैं तो इसका असर भी उन पर ही ज्यादा होगा। बहुत ज्यादा निगरानी और दबाव के चलते अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखना मुश्किल होगा।

