CJI सूर्यकांत ने राष्ट्रमंडल बैठक में उठाई आवाज
CJI सूर्यकांत ने आगे कहा 'क्लाइमेट जस्टिस पर पॉलिसी डायलॉग' के लिए 56 देशों के साझा मंच को संबोधित करते हुए CJI ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों का स्वच्छ ऊर्जा की ओर सामूहिक बदलाव कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम पर निर्भर करता है और इनके खनन के पर्यावरणीय और सामाजिक परिणाम होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे विकासशील देशों को अवास्तविक गति से स्वच्छ ऊर्जा की ओर धकेलने से समाधान के बजाय और अधिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।जस्टिस कांत ने कहा 'इसलिए चुनौती यह है कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव की तात्कालिकता और निष्पक्षता और साझा जिम्मेदारी के सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाया जाए जो इस प्रक्रिया का आधार होने चाहिए।' उन्होंने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने पर्यावरण, पारिस्थितिकी और लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने जाम्बिया के हाई कोर्ट का उदाहरण दिया, जिसने पानी को प्रदूषित करने के लिए एक कॉपर माइनिंग कंपनी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर आसान बदलाव की कोशिशों को मजबूत कर सकते हैं ताकि उनकी आबादी को भारी कीमत न चुकानी पड़े।

