UPI लेनदेन पर चार्ज लगाने का रास्ता साफ, सरकार को नहीं देना होगा इंसेंटिव, कितनी होगी बचत?
Updated on
07-08-2026 01:23 PM
नई दिल्ली: लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को हरी झंडी दे दी है। इससे सरकार को UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने का अधिकार मिल गया है। आरबीआई भी बड़े ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने के पक्ष में है। हाल में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि किसी न किसी को इसकी लागत उठानी होगी क्योंकि यह एक पब्लिक सर्विस है। इससे सरकार के जल्दी ही यूपीआई ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने की संभावना बढ़ गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि MDR केवल मर्चेंट्स पर लागू होता है, यूजर्स या कंस्यूमर्स पर नहीं। अभी NPCI की अगुवाई वाली UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने MDR पर फैसला भी नहीं किया है। संसद से संशोधन विधेयक पास होने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला होगा। माना जा रहा है कि 2,000 रुपये से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर 0.25% से 0.4% तक चार्ज लगाया जा सकता है।
क्या है एमडीआर?
एमडीआर वह फीस होती है जो बैंक और पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनियां हर क्रेडिट और डेबिट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से वसूलती हैं। फाइनेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक यूपीआई पेमेंट की कुल वैल्यू में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) की हिस्सेदारी 29 फीसदी है। अब अगर 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर एमडीआर वसूला जाता है तो करीब 67 फीसदी P2M इसके दायरे में आ जाएंगे। जुलाई के आंकड़ों के हिसाब से यह राशि 5,80,568 करोड़ रुपये बैठती है।
जुलाई में यूपीआई ट्रांजैक्शंस की टोटल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रुपये थी। हिंदू बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर इसे पूरे साल के लिए लागू किया जाए तो 2,000 रुपये से अधिक राशि के ट्रांजैक्शन पर 0.25 फीसदी एमडीआर से 17,416 करोड़ रुपये की कमाई होगी। अगर एमडीआर को 0.5 फीसदी कर दिया तो यह राशि 34,833 करोड़ रुपये होगी। 1 फीसदी एमडीआर की सूरत में यह रकम 69,655 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी।
सरकार देती है इंसेंटिव
फिलहाल सरकार यूपीआई सर्विस देने के लिए बैंकों और सर्विस प्रोवाइडर्स को इंसेंटिव देती है। इस साल के बजट में इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पिछले साल का संशोधित अनुमान 2,196 करोड़ रुपये था। 2022 में आए आरबीआई के एक डिस्कशन पेपर के मुताबिक हर पी2एम ट्रांजैक्शन पर बैंकों, ऐप प्रोवाइडर्स और एनपीसीआई का खर्च कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 0.25 फीसदी है।
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