बलूचिस्तान में चीन का CPEC खतरे में कैसे है?
चीन बलूचिस्तान के अंदर कई प्रोजेक्ट्स चला रहा है। इसकी सीमा अफगानिस्तान और ईरान से लगती है। बलूच फ्रीडम फाइटर्स दशकों से एक अलग देश की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पाकिस्तान और उसके विदेशी सहयोगियों ने स्थानीय समुदायों को दरकिनार करते हुए इस प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया है।'फाइनेंशियल टाइम्स' ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि सैनडक के मैनेजिंग डायरेक्टर ने पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को चेतावनी दी थी कि खराब सुरक्षा हालात के कारण सप्लाई रूट में रुकावट आ रही है जिससे एक महीने के भीतर कामकाज चलाना मुश्किल हो सकता है। सैनडक खदान का संचालन सरकारी कंपनी 'मेटालर्जिकल कॉरपोरेशन ऑफ चाइना' करती है। इसका लीज 2022 में बढ़ाया गया था और यह अपने उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा चीन को निर्यात करती है।
बलूचिस्तान में अशांति के कारण बैरिक माइनिंग के 9 अरब डॉलर के रेको डिक गोल्ड और कॉपर प्रोजेक्ट पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। यह प्रोजेक्ट सैनडक से करीब 50 किलोमीटर दूर है।









