परिवार के सदस्यों के साथ उन्होंने पूरे विधि-विधान से कृषि कार्य में उपयोग होने वाले औजारों और अन्य सामग्रियों की पूजा की। इसके बाद छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार चिला का भोग लगाया गया और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
हरेली के अवसर पर घर के प्रवेश द्वार पर नीम की डालियां लगाने की पारंपरिक रस्म भी निभाई गई। विधायक ने कहा कि हमारी लोकपरंपराओं में प्रकृति, स्वास्थ्य और कृषि का गहरा संबंध रहा है। नई पीढ़ी को भी इन परंपराओं और संस्कृति से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।