मध्य प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों से पहले भाजपा और राज्य सरकार ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार प्रदेश के 183 नगर निकायों में एक हजार से अधिक एल्डरमैन (नॉन-वोटिंग पार्षद) नियुक्त करने जा रही है। इनमें नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतें शामिल हैं।
इन नियुक्तियों को चुनाव से पहले संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन नियुक्तियों को हरी झंडी दे चुके हैं और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग जल्द ही आदेश जारी कर सकता है।
राज्य सरकार ने एल्डरमैन नियुक्ति के लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन, जबकि 10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा नगर पालिकाओं में 6-6 और नगर पंचायतों में 4-4 एल्डरमैन नियुक्त करने का प्रावधान रखा गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी देकर चुनावी तैयारियों को धार देना चाहती है। इससे पार्टी को बूथ और वार्ड स्तर पर संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राज्य सरकार को कुल 1,080 एल्डरमैन नियुक्त करने की सिफारिश भेजी थी। प्रस्ताव के अनुसार 13 नगर निगमों में 105, 56 नगर पालिकाओं में 325 और 114 नगर पंचायतों में 650 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। इनका कार्यकाल लगभग एक वर्ष का होगा, क्योंकि जुलाई 2027 में स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं।
इससे पहले सरकार ने 169 नगर निकायों में 768 एल्डरमैन नियुक्त करने के आदेश 29 मार्च को जारी किए थे। इनमें 123 नगर परिषद और 46 नगर पालिकाएं शामिल थीं। हालांकि पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण तीन महीने बाद भी इन नियुक्तियों का गठन संबंधी नोटिफिकेशन जारी नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप ये नियुक्तियां अब तक कागजों में ही अटकी हुई हैं।